बदलते मौसम के साथ स्वास्थ्य सम्भन्धी खतरों से कैसे बचें?

इन दिनों में मौसम में बहुत तेज़ी से बदलाव आ रहा है। दिन भर में तापमान कई बार ऊपर नीचे होता रहता है, दिन में यदि तापमान सामान्य है तो रात और सुबह के समय बहुत काम तापमान दर्ज़ किया जा रहा है। ऐसे बदलते मौसम में तबियत का बिगड़ना बहुत आसान है। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना बहुत ज़रूरी है और थोड़ी सी भी लापरवाही आपके लिए काफी भारी पड़ सकती है। अपने आप को इस बदलते मौसम के साथ स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों से बचने के लिए कुछ उपाय इस्तेमाल कर सकते हैं।

मौसम में ये जल्दी से बदलाव काफी बिमारियों का कारण बन सकता है। बदलते मौसम में सेहत का ख्याल रखना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है। मौसम में तेज़ उतार चढ़ाव के चलते शरीर बिमारियों का शिकार बन जाता है। यदि आपका शरीर सर्दी से गर्मी और गर्मी से सर्दी में जायेगा तो आप बेहद जल्दी बीमार पड़ सकते है। अपने आप को बिमारियों से बचाने के लिए आप कुछ सावधानियां ले सकते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है

स्वास्थय विशेषज्ञों का कहना है की बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ऐसे मौसम में सर्दी, जुकाम और बुखार की परेशानी बहुत ऐसे मौसम में खाने पीने के बदलाव से आप अपने आप को बिमारियों से बचा सकते है। सर्दी होने पर गर्म पाय पदार्थों की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

गर्मी की समस्या होने पे आपको बहुत सारा पानी और पाय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। ऐसे मौसम के बदलाव में वायरल बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है। बदलते मौसम के चलते, छोटे बच्चों को बीमार होने के बीमार होने के सबसे ज़्यादा संभावना होती है। कभी गर्म और कभी सर्द मौसम में बहुत सारी बिमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

बदलते मौसम में होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं व उपाए !

  • जुकाम – ठन्डे मौसम में हमारे शरीर के तापमान में गिरावट आ जाती है। ऐसे में वातावरण के अनुसार कपडे पहनना बहुत ज़रूरी है। जुकाम से अपने आप को बचाये रखने के लिए आपको अपने हाथों को साफ़ रखना बहुत ज़रूरी है। अपने हाथ को साफ़ रखने के लिए उन्हें बार बार धोएं जिससे ना दिखने वाले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
  • सरदर्द – सर्दी में ठंड सर पे लग जाए तो सरदर्द भी हो सकता है। सर्दियों में बहुत महत्वपूर्ण है की आप अपने सर को ढक के रखें। काफी बार ऐसे सरदर्द का कारण कम पानी पीना भी हो सकता है। इसीलिये ये बहुत ज़रूरी है की आप सर्दियों में काम से काम 8 गिलास पानी ज़रूर पिएं।
  • दमा या अस्थमा – दमा और अस्थमा सर्दियों में एक और होने वाली बीमारी है। ठंडी हवाएं दमा के लक्षणों को और गंभीर बना सकती है, जिससे सांस लेने में बहुत परेशानी हो सकती है। सर्दियों में दमा और अस्थमा के मरीज़ों को अपने साथ हमेशा दवाई रखनी चाहिए।
  • गठिया या हड्डियों में दर्द – गर्मी से सर्द मौसम में बदलाव के दौरान जिन लोगो को गठिया होता है, उन्हें ठन्डे वातावरण में बहुत ज़्यादा तकलीफ हो सकती है। यदि आप भी ऐसी किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो सर्दी से बचाव करना और रोज़ाना व्यायाम करना कारगर साबित हो सकता है।
  • हार्टअटैक – सर्दियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने की ज़्यादा संभावना रहती है। हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण ब्लड प्रेशर बढ़ना होता है, जब आपका ब्लड प्रेशर बढ़ता है तो आपके ह्रदय पे अतिरिक्त बढ़ाव पड़ता है।
  • गैस्ट्रोएन्टराइटिस – छोटे बच्चों में गैस्ट्रोएन्टराइटिस, आंतो और पेट में सूजन के एक बहुत बड़ा कारण रोताविरुस भी हो सकता है। यह समस्या अधिकतर सर्दी और गर्मी के शुरुआत में होती है। इस समस्या में उलटी और दस्त की समस्या बेहद सामान्य होती है जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो जागती है। मौसम के बदलाव में गैस्ट्रोएन्टराइटिस की समस्या से अपने आप को बचाये रखने के लिए पानी की अत्यधिक सेवन करना चाहिए।
  • खांसी – गर्मियों से मौसम सर्दियों में परिवर्तन के समय बहुत सारे लोगो को खांसी की समस्या रहती है। अपने आप को खांसी की समस्या से बचाने के लिए कोल्ड ड्रिंक और आइस क्रीम का सेवन ना करें।

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